7 फ़रवरी 2021

7 दिन की 7 कहानी.. पहली कहानी :)

लोग अक्सर अपनी असलियत जाहिर करने से डरते हैं, पर मुझे ख़ुद को लेकर कभी भी कोई डर नहीं था। रिश्तों की नींव सच्चाई पर टिकती है। मैंने तुमसे हर एक बात बताया, तुम्हारे आने से पहले मेरी ज़िन्दगी में कौन था या मैं अपनी ज़िन्दगी कैसे जीता हूँ ताकि किसी और से ये सब बातें जानकर तुम्हें तकलीफ़ ना हो।

ये कहना कि मैं किसी से प्रेम करता हूँ और उस प्रेम को निभाना, दो अलग अलग चीज़ें हैं। मैंने अपने प्रेम को तुम्हारे लिए हमेशा समर्पण माना। लोगों के आने जाने से विचार तो बदल जाते हैं पर कुछ ऐसी भावनाएं जो समय के साथ उत्पन होती हैं वो नहीं बदल पाती ताउम्र।

मैं नहीं जानता तुम्हें मुझसे सच्ची मोहब्बत थी या नहीं पर तुम हमेशा से मेरे लिए सर्वोपरि थी। तुम्हारे चले जाने के बाद मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं थी और ना आज है। परिस्थितियां इंसान को मजबूर कर देती है अलग होने के लिए, वरना कौन ऐसा शख़्स होगा जो अपनी मुस्कुराहटों वाली दुनिया से अलग होना चाहेगा।


तुम्हें मेरे प्रेम का एहसास तब हुआ जब मेरी भावनाएं खत्म होने वाली थी, प्रेम तो अटल था। यकीं मानो यदि तुम आज भी लौट कर आई तो मैं तुम्हें बिल्कुल पहले की तरह ही मिलूंगा।


लेकिन मैं ये जानता हूँ कि अब तुम कभी नहीं आओगी, अपनी नई दुनिया में तुम सदा ख़ुश रहना। मैं एक ऐसा प्रेमी बनकर रह गया जो अपनी प्रेमिका को दुआओं के सिवा अपनी दुनिया में जगह तक ना दे पाया। मुझे ख़ुशी है कि हम आपसी सहमति से अलग हुए, पर तुम्हारे मना करने के बावजूद भी मैंने तुम्हें एक दिन मैसेज कर ही दिया। वो दिन मेरे लिए था ही इतना ख़ास, मुझे आज भी लगता हैं कि तुमने मेरे उस मैसेज के लिए झूठी बेरुखी दिखाई थी। ख़ैर, मैं उस दिन दिल(?) के हाथों मजबूर था, वरना मैं कभी तुम्हें कॉल या मैसेज नहीं करता। तुम्हारी ख़ुशी जो शामिल थी इस अलगाव में।


तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल मेरे जेहन में हमेशा संचित रहेगा। तुम्हें मालूम ? ऐसा लगता है जैसे कल ही की तो बात है, तुम अपने घरवालों की नज़रों से बचकर छत पर आकर मुझसे बात कर रही हो और मैं इधर तुमसे बात करते हुए ये सोच रहा हूँ कि जो किताबें तुम्हें पसंद आई है वो तुम्हें कब भेजूं। तुम्हारी वो पहली कलाकारी जो तुमने एक बुकमार्क को अपने सारे नेलपेंट के कॉम्बिनेशन से कलर किया था और सिर्फ़ एक बार कहने पर ही तुमने मुझे भेज दिया वो, आज भी मैंने वैसे ही सहेज कर रखा है जैसे धरती किसी खो गए बीजों को संचित करके रखती है, पौधों के ख़त्म हो जाने के बाद भी।


ये लड़का क्या चाहता था ? तुमसे बस इतना ही कि मुझे भूलना मत कभी, कभी भी नहीं। महीने में एक या दो बार भी याद कर लेना।  मैं इंस्टा पर फोटोज़ डालते रहता हूँ तुम्हारे कहने पर, उसे देखती रहना हमेशा। मेरा ब्लॉग भी चेक करती रहना, कर ही रही होगी तुम, मुझे उम्मीद है।
मैंैैंैंंै
ख़ैर, छोड़ो बातें पुरानी हो गई हैं। मैं कोशिश करूँगा कि अब मैं ना भटकूं और मैं अब ख़ुद को ख़ुद के पास ही रखूंगा, दुनिया वालों से अपनी बातें जितना हो सके उतना कम बाँटूगा। पर इसका वादा मैं ख़ुद से न अब कर सकता हूँ न ही तुम्हारे आने के पहले कभी किया था।

Face with tears of joy

❤ :)

5 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    09/02/2021 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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  2. वाह!सुंदर अभिव्यक्ति ।

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