9 सितंबर 2012

ये मै कहाँ आ गया...

पहले कच्चे घर मे,
पक्के दिल वाले मिलते थे
अब पक्के घर मे कच्चे दिल वाले मिलते हैं,यहाँ
ये मै कहाँ आ गया...
हँसते-मुस्कुराते चेहरे बेशक लगते हैं प्यारे,
पर मुस्कुराहट के पीछे अब
कोई मतलब जुड़ा है,यहाँ 
ये मै कहाँ आ गया...
जिंदगी के राह पर चलते-चलते
मिल जाते हैं कई अनजाने लोग
कोई अपना तो कोई सपना सा लगता है 
पर अब देखता हूँ,कि
कोई भरोसा के लिए तो
कोई भरोसा करके रोता है,यहाँ
ये मै कहाँ आ गया...
हर ज़ज्बात को जुबान नही मिलती है
हर आरजू को दुआ नही मिलती है
अब दुःख-दर्द को गुस्से का नाम दिया जाता है
अब तो,
पलकों पर बिठाया जाता है,नजरों से गिराने के लिए,यहाँ
ये मै कहाँ आ गया...
मेरे खुदा अब अच्छा नही लगता है ये जहाँ 
ये मै कहाँ आ गया...?
     
                      - "मन"

27 टिप्‍पणियां:

  1. हर ज़ज्बात को जुबान नही मिलती है
    हर आरजू को दुआ नही मिलती है..........
    ...........................................
    उम्दा ख्यालात, गहरे जज्बात..........
    bahut sundar mango man sahab

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  2. मैं ठीक जगह में आई हूँ
    मुझे हकीकत में इसी किस्म की दिल की जरूरत है
    बुधवार को नई- पुरानी हलचल मे सबको दिखाउँगी
    कि देखो रे भाइयों.... है न एक दम पक्का
    आप भी आईये न मन्टू भइया बुधवार इसी को नई- पुरानी हलचल मे

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    1. यशोदा दीदी,आपका बहुत-बहुत आभार |

      और 'मन्टू भइया' नही केवल 'मन्टू'....:)

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  3. bahut achchhe se apne man ki baat kahii hai ...
    likhate raho ...shubhkamnayen ...

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    1. मन के कोने मे आपका स्वागत है |

      आभार |

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  4. Duniya me aisi jagah bhi hai, yah kaise pataa chalta agar yahan n aate? Ab likhna ki yahan ke haalaat badalne ke liye kya plan hai ! Be positive !

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    1. जी सही कहा आपने |
      अब इसका समाधान ढूँढना पड़ेगा....|

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  5. bahut accha lika hai,likhte raho smarty, i think you are senior to me on blog!

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    1. ये तो आपका बड़पन बोल रहा है,सर |

      एक बात और "आपका स्वागत है",इस ब्लॉग पर....:)

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  6. ज़िन्दगी का क्रम समतल रास्तों पर नहीं होता, ऐसा होता तो न सूर्यास्त होता न चिड़ियों का गान होता .... उतार-चढ़ाव उतरते चढ़ते अनुभव होते हैं इन क़दमों के निशां की तरह , जैसा आपने लिखा है ... गहरी अभिव्यक्ति

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  7. बहुत बढ़िया...पढ़ाई के साथ साथ यूँ ही लिखते रहो..शुभकामनाएँ.

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  8. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....

    अनु

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  9. ऐसे ही तो नहीं कोई आता यहाँ ... मकसद तय होता है हर किसी के आने का ...
    इस बिगड़े हुवे को खुद सवारने का ...
    बहुत लाजवाब लिखा है आपने ..

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    1. जी बिल्कुल सही कहा आपने |

      आपका स्वागत है,सर...

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  10. पक्के मकानों में कच्चे दिल मिलते हैं .... बहुत खूब

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  11. वाह .. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  12. ये मैं कहां आ गया, अब अच्छा नही लगता ये जहां ।
    क्या करें जीना तो यहीं है ।

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  13. उत्तर
    1. जी,फूल भी तो काँटो में ही खिलते हैं |

      आभार |

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