अच्छा सुनो!
सर्दियाँ आ रही, नियम से रोज़ 15 मिनट धूप में बैठना
किशोर कुमार के गाने सुनना शुरू करना और पापोन के किसी गाने को ख़त्म करके ही उठना..या गाना नहीं तो कम से कम अपने प्रिय कवि/कवयित्री की कोई एक कविता बोल के पढ़ना, उसे याद कर लेना
...याद से याद आया, मुझे भूलना नहीं 🙈
और हाँ, मेरे जित्ता ट्विटर न करना नाही फोटू खचैक करना... रोना तो बिल्कुल नहीं। नहीं तो रोना आए तो याद करना कैसे तुम्हें घुमा के पीठ पर मैं मुक्के जड़ता था..हालाँकि तुम घूमी भी नहीं कभी..हाँ पर रोना नहीं
और और और जो गिनती के गाने मैंने बातए उन्हें तो कभी न सुनना, सपने में भी नहीं
बच्चों को देखकर ऐसे मुस्कुराना कि उन्हें पुरज़ोर यक़ीन हो जाए कि दुनिया बहुत ही ज़्यादा ख़ूबसूरत है। भाई का ध्यान रखना, उसकी चाय झूठी ना करना। भाई को अकेले कभी कभार ही छोड़ना..
मंदिर.. हाँ मंदिर चले जाना रोज़ नहीं तो गैप करके। ख़ूब पढ़ना और हो सके तो कॉफ़ी कम करके चाय पीना
तुम्हारे बताए गाने, फ़िल्म, किताब, जगहें भला मैं कैसे भूलूँगा, भूलने की हर कोशिश कामयाब नहीं होती और तुम, तुमसे जुड़ी हर एक बात हर एक पहलू शिद्दत से याद आने लगते हैं और एक बात बताऊँ, मैं इन सबको भूलना भी नहीं चाहता 🙈
तुम ऐसे गुज़री हो जैसे बर्फ़ की सिल्ली से हवा गुज़र के किसी बुखार से ग्रस्त रोगी के ज़हन से छू गई हो। तुम उतना ही ठहर गई हो मुझमें जितना गंगा के पानी में पहाड़ी औषधीय पौधों के गुण, तुम मेरे उतनी ही क़रीब हो गई हो जितना कि उत्तर दिशा से ध्रुव तारा।
पर सबसे अच्छी बात ये हुई कि
..कि तुम मुझमें आई भी ठहरी भी और शायद जा भी चुकी हो पर मेरा वजूद ज्यों का त्यों हैं। और क्या चाहिए एक दीवाने को। तुम्हारे आने के पहले और अब तुम्हारी अनुपस्थिति के बाद के दोनों 'मैं' में जो अंतर व्याप्त है वो सोचता हूँ तो अलग ही एहसास से भर जाता हूँ, तुम्हारा बस होना ही ❤
हम इसी पीढ़ी के हैं बावजूद हमारा इश्क़(?) सदियों पुराना वाला। और इस एक बात पर यक़ीन करके हम दोनों ने ही दोनों का बहुत भला किया है। नहीं तो आज के इश्क़ का अंज़ाम रुका हुआ पंखा, तेज़ भागती बसें/रेलगाड़ियां और उफ़नती हुई दरिया तय करती हैं।
बताया ना, हम ज़रूर इसी पीढ़ी के हैं मगर..
मगर सच्चे लगते हैं ये धरती ये नदियाँ ये रैना और tummmmmmmmmmmmmmmmm ❤ फ़िर गाने में घुस गया मैं 😐 तो मैं कह रहा था कि.. देखो यहाँ भी केवल मैं ही कह रहा हूँ.. तुम्हें कभी मौका नहीं दिया मैंने बोलने को। मैं श्रापित हूँ यार, मेरी कहानियाँ मेरे मौत के साथ ही ख़त्म होगी
और ये मौत की बात हम क्यों करने लगे भला
तुम हर बारी मेरे अगली कहानी के फ़िर से शुरू होने के दरमियान "हाँ ह्म्म्म अच्छा भक्क ठीक है बाबा" कहती रही.. कभी कभी बोलने का मौका दिया पर वो इसलिए कि लिखते-लिखते बोलते-बोलते मैं थक जाता था इसलिए 🙈
7.83 ग्राम दुःख इस बात का है कि तुम जैसी शख़्सियत से जुड़ के, बातें करके भी मेरे से चुप नहीं रहा गया ये जानने के बावजूद कि 'सुनना' सभी कलाओं में सर्वोपरि है शायद! फ़िर भी मैं बड़बड़ाता गया और तुन ध्यान से सुनने में और माहिर हो गई। इसके लिए शुक्र अदा करना मेरा, जहाँ भी होना :)
चलो हो गए मेरे धूप में 15 मिनट :)
'लेकर हम दीवाना दिल' से शुरू किया था और पापोन का 'ये मोज़ेज़ा(चमत्कार) भी कभी, मोहब्बत दिखाए मुझे, के संग(पत्थर) तुझपे गिरे और जख़्म आए मुझे' गाना ख़त्म हो गया।
नीचे चलता हूँ अब, पेट भरने का जुगाड़ करता हूँ :)
:)
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