27 सितंबर 2012

जिंदगी...



                                             किसी के लिए ख्वाहिश है...
                                             तो किसी के लिए एक सच्चाई है जिंदगी...
                                             कोई समझे तो सहेली है...
                                             जो ना समझे तो अबूझ पहेली है जिंदगी...
                                             हर पल बिगड़ के जो...
                                             हर पल सँवरे वो है जिंदगी...
                                             किसी के लिए पराई है...
                                             तो किसी के लिए प्यारी है जिंदगी...
                                             कुछ के लिए कुछ भी नही...
                                             तो किसी के पास केवल हैं ही जिंदगी...
                                             कुछ...
                                             खोकर,पाने का नाम है जिंदगी...
                                             हारकर,जीतने का नाम है जिंदगी...
                                             गिरकर,उठने  का नाम है जिंदगी...
                                             रोकर,हँसने  का नाम है जिंदगी...
                                             जो जी रहे वो भी नही...
                                             केवल साँस चलने का नाम भी नही...
                                             हर साँस में हो आश वो कहलाती है जिंदगी...

                                             ख्वाहिशों के ताने-बाने से बुनी है और...
                                             जो आंसू पी-पी के मुस्कुराती है वो है जिंदगी...

                                                                                           - "मन"

22 टिप्‍पणियां:

  1. Zindgi se paane ke dinon men zindgi ko dene layak soch rakhna chhoti baat nahin hai.Achchha likha hai...umda.

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    1. मै भी यही चाहता हूँ कि कोई शिकायत ना रहे जिंदगी को,मुझसे....|

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  2. कुछ...
    खोकर,पाने का नाम है जिंदगी...
    हारकर,जीतने का नाम है जिंदगी...
    गिरकर,उठने का नाम है जिंदगी...
    रोकर,हँसने का नाम है जिंदगी...
    हर साँस में हो आश वो कहलाती है जिंदगी...
    ये ज़ज्बा बनाए रखियेगा पूरी जिंदगी ....
    कभी दगा नहीं दे सकेगी ये जिंदगी ............

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    1. एक "ज़ज्बा" ही तो है जिसके सहारे बढ़ रही है ये जिंदगी |

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  3. हाँ जी मैंगो मैन साहब....
    खूब पोस्टमार्टम कर रहे हैं जिन्दगी का
    क्या बात है ? ...
    बहुत ही सुन्दर

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    1. :)
      बात तो कुछ भी नही है बस इस बार मन के शब्द निकले और "जिंदगी" के सहारे आप-सबों तक पहुँच गई |

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  4. हर पल बिगड़ के जो...
    हर पल सँवरे वो है जिंदगी...
    बिल्‍कुल सही कहा ...

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  5. ज़िन्दगी कभी आसान नहीं होती... बस परेशानियां बदलती जाती हैं, और हम धीरे धीरे उनके अभ्यस्त होते जाते हैं... और हम बस यही सोच सकते हैं... ये वक़्त भी गुज़र जायेगा...

    अक्सर ज़िन्दगी के जंगल में आगे बढ़ते बढ़ते डर सा लगने लगता है... हम बढ़ते तो जा रहे हैं, कई सारे सपने भी देखे हैं लेकिन जाने आगे क्या होने वाला है... बस यूँ ही अचानक से मन उदास हो जाता है....

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    1. सही कहा भईया |
      जिंदगी में परेशानियां ना हों तो शायद हम 'जिंदगी' का मतलब भी ना जान पाए...जैसे-जैसे वक्त गुजरता जाता है वैसे-वैसे हम,इसके और करीब आते जाते हैं |यह हर कदम,हर पल सबक देती है,कभी डराकर तो कभी सपने दिखाकर |
      जिंदगी बहुत ही छोटी और खूबसूरत है...फैसला हमारे हाथों में है कि हम क्या चाहते हैं |

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  6. जिन्दगी के फ़लसफ़े
    बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति...
    बहुत सुन्दर...
    :-)

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    1. जिंदगी के फलसफ़े...आज कुछ और कल कुछ और...

      आभार |

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  7. उत्तर
    1. जी...और कौन सा रंग कब चढ़े कोई खबर नही...
      आभार |

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  8. उत्तर
    1. जी बिल्कुल सही फ़रमाया...असली रंग तो जिंदगी के सफर में ही दीखते हैं |

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  9. ज़िंदगी ज़िंदा दिली का नाम है मुर्दा दिल क्या ख़ाक जिया करते हैं।

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  10. सच्ची....यही तो है ज़िन्दगी...
    और हम गुज़ार देते हैं सारी उम्र इसे खोजते खोजते....

    अनु

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  11. आज 02/10/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

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आपका कुछ भी लिखना,अच्छा लगता है इसीलिए...
कैसे भी लिखिए,किसी भी भाषा में लिखिए- अब पढ़ लिए हैं,लिखना तो पड़ेगा...:)